Friday, December 12, 2014

कठिनाई के बाद मिली सफलता का आनंद ही कुछ और -निखिल राज


सीवान जैसे छोटे से जिले में जन्मे निखिल राज आज किसी पहचान के मोहताज़ नहीं हैं आत्मविश्वास ,सादगी ,मेहनत और सफलता जैसी शब्दों को अपने आप में समेटे हुए निखिल राज़ का कहना है की -इंसान को कठिनाइयों की आवश्यकता होती है,क्यूंकि सफलता का आनंद उठाने के लिए ये जरुरी हैं।
निखिल राज़ ने कला के कई विधा में अपनी निपुणता साबित की है ,इन्होने अपने आप को एक उम्दा अभिनेता के रूप में साबित किया ,तो कभी एक बेहतरीन निर्देशक के रूप में,तो कभी ऐसे लेखक के रूप में अपने आपको प्रस्तुत किया जिसके शब्दों मे गहराई होती है महुआ चैनल पर भौकाल के चौपाल जैसे चर्चित शो  से राजनीति  में हलचल मचा चुके निखिल राज़ दूसरी बार चर्चा में तब आये जब इन्होने देख के..... जैसी फिल्म बनाई। इन्होने ये प्रयास तब किया जिस समय भोजपुरी फिल्मो में सिर्फ द्विअर्थी संवादों और फ़ूहड़ गानो का बोलवाला है। क्योकि निखिल राज़ द्वारा निर्देशित भोजपुरी फिल्म  देख के एक ऐसी फिल्म है '' जिसमे हर युवा अपने आपको देखेगा और वो अपने अंदर ऐसा बदलाब महसूस करेगा जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती है। देख के...''. प्रदर्शन जल्द ही प्रदर्शन को तैयार है ,और प्रदर्शन से पूर्व ही फ़िल्मी गलियो में खासा चर्चित हो चुकी है। वर्तमान में निखिल राज महुआ प्लस के चर्चित शो भोजपुरी के पाठशाला को लेकर काफी चर्चित हैं। जिसे भारत का पहला इम्प्रोवाइज्ड शो होने का गर्व भी प्राप्त है। शो का कांसेप्ट भी खुद निखिल राज़ ने और राघवेश अस्थाना ने मिलकर तैयार किया है।  दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढाई पूरी करने वाले निखिल राज का पहला सपना तो अश्लीलता मुक्त हो भोजपुरी अपना है। इसी मिशन के तहत कार्यरत  निखिल कहते हैं - मेरे  जेहन में एक से एक विषय है जिसपे मैं एक एक कर के काम करूँगा।  जिसका एक नमूना है देख के.... ज़ो जल्द ही प्रदर्शन को तैयार है। फिलहाल बी. के. पी. को लेकर व्यस्त निखिल राज़  अपने दर्शकों को नववर्ष की शुभकामनाओं  के साथ एक बार फिर कहते हैं --इंसान को कठिनाइयों की आवश्यकता होती है,क्यूंकि सफलता का आनंद उठाने के लिए ये जरुरी हैं।udaybhagat@gmail.com