Tuesday, January 27, 2015

Leke aaja band baja ye Pawan Raja News in Times of India

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Friday, January 23, 2015

Actress Khyati Interview in Rashtriya Sahara All Editions


Leke aaj Band Baja ye Pawan Raja Music Release


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मेरी फिल्मों में नहीं होंगे द्विअर्थी संवाद - ख्याति

असमिया सिनेमा की चर्चित अभिनेत्री ख्याति की नयी पारी भोजपुरी में शुरू हो चुकी है। उनकी पहली फिल्म ‘लेके आजा बैंड बाजा ए पवन राजा’ रिलीज के लिये तै यार है। दूसरी फिल्म ‘बलमुआ तोहरे खातिर’ की भी शूटिंग पूरी हो चुकी है। तीसरी फिल्म का मुहूर्त और पहली फिल्म का म्यूजिक रिलीज एक साथ लीक से हटकर मुंबई के फाइव स्टार होटल में किया गया। ख्याति कहती हैं कि भोजपुरी के स्तर को उठाने की दिशा में उठाया गया यह पहला कदम है।
असमिया फिल्म इंडस्ट्री की आप एक सफल अभिनेत्री हैं, लेकिन आपने हिंदी में जाने की बजाए भोजपुरी को अपना लिया, इसकी कोई खास वजह?
 हिंदी में हर किसी की जाने की इच्छा होती है। हो भी क्यों नहीं, हिंदी की दुनिया बहुत बड़ी है। करोड़ों दर्शक मिलते हैं जो पूरी दुनिया में फैले हुए हैं। लेकिन भोजपुरी भी कुछ कम नहीं है। मुझे बार-बार लगता रहा है कि भोजपुरी की ऐसी स्थिति क्यों है? मेरे जानने वालों में भोजपुरी भाषी बहुत हैं, उनके पास एक ही जवाब होता है कि यहां अच्छी फिल्में नहीं बनती हैं। मैं हिंदी की तरफ बढ़ ही रही थी कि भोजपुरी चैलेंज की तरह सामने खड़ी हो गयी। तब मुझे लगा कि इस चैलेंज को स्वीकार लेना चाहिये। मेरा अपना प्रोडक्शन हाउस है क्रिस्प एक्जिम प्रा. लिमिटेड। इसी बैनर से भोजपुरी फिल्में बनाने का मैंने फैसला कर लिया। भोजपुरी की दो फिल्में बनकर तैयार हैं, तीसरी का भी मुहूर्त हो गया। हिंदी भी करुंगी, यह सोच लिया है। किसी भी दिन यह खबर देकर चौंका दूंगी।
पहली और दूसरी फिल्म करते हुए क्या लगा कि भोजपुरी की इमेज बदली जा सकती है?
 यह मुश्किल नहीं है। पहले तो अच्छी फिल्में ही बना करती थीं, लेकिन बीच के कालखंड में कुछ मिलावट आ गयी, उसके पीछे बहुत सारे कारण गिनाये जाते हैं, लेकिन मैं मानती हूं कि बिगड़ी हुई स्थिति को फिर से बदला जा सकता है। उस दिशा में मैंने अपने पांव बढ़ा दिये हैं और मुझे न केवल समर्थन मिलने लगा है बल्कि तारीफ भी मिल रही है। ऐसा महसूस हो रहा है कि बदलाव को देखने वाले हर गली मोहल्ली में हैं, वे बस किसी की पहल का इंतजार कर रहे हैं। जाहिर है कि और भी लोग इसमें लगे होंगे। उस कतार में मेरा भी नाम आ गया है। मेरा यह दावा है कि लोगों को मेरी फिल्मों में न भद्दे सीन दिखाई देंगे और न डबल मीनिंग संवाद। पूरा परिवार एक साथ बैठकर थियेटर में देख सकते हैं, इसी की कमी महसूस की जा रही थी। अपनी फिल्मों में मैं खुद लीड रोल में हूं। ‘लेके आजा बैंड बाजा ए पवन राजा’ और ‘बलमुआ तोहरे खातिर’ में मेरे अपोजिट पवन सिंह हैं। अपनी सीमाओं के बावजूद मेरी फिल्मों का प्रमोशन हिंदी की तरह ही होगा। लोगों को यह बताना जरूरी है कि भोजपुरी भी किसी से कम नहीं है और यहां भी स्तरीय फिल्में बनने का सिलसिला शुरू हो चुका है, तब आपको मल्टीप्लेक्स थियेटर मिलने में दिक्कत नहीं आयेगी।
 विदेश में भी दर्शक अच्छी भोजपुरी फिल्मों का इंतजार कर रहे हैं। इस भाषा की कितनी फिल्में आपने देखीं?
 फिल्में तो देखी ही, काफी रिसर्च भी किया। जैसे-जैसे रिसर्च आगे बढ़ रही थी, मेरी हैरानी भी बढ़ रही थी कि इतनी समृद्ध भाषा का यह हाल क्यों है? यहां तो ऐसी फिल्में बननी चाहिये थी जिससे लोग गर्व से सिर उठाकर चल सकें, लेकिन लोग न केवल गालियां निकालते हैं बल्कि खुद को भोजपुरी भाषी कहने में भी संकोच करते हैं। यह एक तकलीफदेह बात है। तब मैंने यह सोचा कि अगर असमिया की सौ से भी ज्यादा फिल्में बनायी है तो कुछ भोजपुरी बनाने का रिस्क भी उठा लिया जाये, लेकिन यह तय करके यहां आयी हूं कि ऐसी फिल्में बनाऊंगी जो परिवर्तन का औजार बन जाये। दर्शक भी गर्व कर सकें। वे थियेटर आने के लिये बाध्य हो जायें।
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Thursday, January 22, 2015

रहस्यमय प्रेम-कहानी है ‘‘पराया प्यार’’


एल.एच.के. एडवर्टाइजिंग एण्ड फिल्म्स के बैनर तले बनी हिन्दी फिल्म ‘‘पराया प्यार’’ एक त्रिकोणात्मक प्रेम-कहानी है जो रहस्य-रोमांच के साथ आगे बढ़ती है। पिछली सदी के आठवें दशक की एक रुमानी दास्तान है यह फिल्म। फिल्म की कहानी एक अनिवासी भारतीय (एन.आर.आई.) से शुरु होती है, जो लंदन से अपनी मंगेतर के साथ भारत वापस आता है। यहां उसके पिता हैं, उसकी दादी है। एक डांस कार्यक्रम देखने के बाद वह घर लौटता है, तब तक आंधी-तूफान आ जाता है। उसकी दादी की गाड़ी खराब हो जाती है, सो वह रास्ते में ही फंसी रहती है। इधर लंदन से आयी लड़की खिड़की दरवाजे बंद करने के क्रम में एक पुस्तक उठाती है कि उसमें से एक फोटो गिर पड़ती है। लड़की उस फोटो को वापस उस उपन्यास में रखने के लिए उठाती है। लेकिन, उस तस्वीर को देखते ही वह चैंक जाती है। वह तो उसकी मां की तस्वीर है?! पर, उसकी मां तो कभी यहां थी ही नहीं! फिर.... ये तस्वीर....क्या है रहस्य.... कैसा है रोमांच। इसका उत्तर लेखक-निर्देशक एल.एच. खान की फिल्म ‘‘पराया प्यार’’ है। फिल्म के निर्मातागण हैं-एल.एच. खान, एम. बिलाल और एम. नईम। सह-निर्माता एम.एस. हिब्बावाली व लाईन प्रोड्यूसर डाॅ. तस्नीम अहमद तथा दुर्गा प्रसाद शर्मा हैं। ताहिरा मेंहदी, एल.एच. खान एवं एम. नईम के गीत हैं, संगीत कमाल मखदूम और किशोर मल्होत्रा का है। सम्पादन कोमल वर्मा का, नृत्य निर्देशन-कमलनाथ और छायांकन हुसैन शेख,  सलीम व रियाज शेख का। मुख्य कलाकार हैं-नवोदित सनी खान, शालिनी श्रीवास्तव, सृष्टि कार्णिक, अयूब खान, फरहीन, बिन्दु, वीणा, सुषमा सेठ, किशोर भानुशाली और किरण कुमार। यह फिल्म शीघ्र ही सर्वत्र प्रदर्शित होनेवाली है।