Tuesday, December 8, 2015

भीड़ का हिस्सा बनने हिंदी में क्यों जाना - अंजना


 भोजपुरी सिनेमा में अंजना सिंह को लेकर कहा जाता है कि वह अपना भाग्य ऊपर से लिखवा कर आयी है। वह हर साल अपने ही रिकार्ड को अपनी ही फिल्मों से तोड़ती जा रही हैं। अगर अंजना को व्यस्ततम हीरोइन कहा जाए तो गलत नहीं होगा। हालांकि 2013 में शादी के बाद डेढ़ साल तक अपने निजी जीवन को इंज्वॉय करती रही लेकिन जब लौटी तो डिमांड में आ गई। आज की तारीख में एक बड़ी हीरोइन के रूप में अंजना सिंह शीर्ष पर बैठने की स्थिति में आ गयी हैं। उल्लेखनीय है कि अंजना सिंह ने भोजपुरी फिल्म जगत में रवि किशन के साथ ‘‘फौलाद’ से कदम रखा था और अपने शुरुआती साल में ही 12 फिल्मों की शूटिंग कर एक अनूठा रिकॉर्ड बनाया था। साल 2013 में भी अंजना की 12 फिल्में रिलीज हुई थी। भोजपुरी की हॉट केक कही जाने वाली अंजना सिंह की बादशाहत आगे भी लगातार जारी रहने की उम्मीद जताई जा रही है
यह कहा जाता है कि शादी के बाद खासकर हीरोइन की डिमांड कम हो जाती है लेकिन आपके मामले में तो यह उल्टा साबित हो रहा है? 
मुझे भी यह सब सुनकर कभी कभी आश्र्चय होता है। शादी निजी फैसला होता है, इसका फिल्मों से कोई संबंध नहीं होता। फिल्म में एक्टिंग चाहिए, अगर स्क्रिप्ट के अनुसार जिम्मेदारी के साथ कोई एक्टर न्याय करता है तो उसी को देखा जाना चाहिए। कोई बताये कि क्या ऐश्वर्या राय, करीना की डिमांड कम हो गयी? मैं अपनी तुलना उनसे नहीं कर रही हूं लेकिन मेरा सवाल लोगों से है कि हॉलीवुड की हीरोइनों पर तो कोई सवाल नहीं खड़ा करता कि शादी के बाद भी कैसे टॉप पर बनी रहती हैं। दरअसल हमारी मानसिकता ही कुछ ऐसी हो गयी है कि मान लेते हैं कि शादी के बाद हीरोइनों का करियर खत्म हो जाता है। हां, कुछ अपवाद से इनकार नहीं किया जा सकता। इस मामले में मेरी स्थिति कुछ अलग है कि निर्माता-निर्देशक ने मुझे कभी इनकार नहीं किया। जब शादी के बाद निजी जीवन को जी रही थी, तब भी बुलावा आ रहा था। जब लौटी तो पहले के अंदाज में ही मुझे इंडस्ट्री ने स्वीकार किया। मेरे पास काफी फिल्में आ गयी हैं।
क्या कभी ऐसी भी स्थिति आयी कि लगा हो कि सिनेमा कि दुनिया को अलविदा कर देना चाहिए? 
मेरे जीवन का एक सबल पक्ष यह भी है कि मुझे हर हाल में रहना आया है। कभी निराश नहीं होती। असफलता के अंदेशे को भी स्वीकार कर चलती हूं। वही मुझे आगे बढ़ने की ताकत भी देता है। हर जगह तो स्पर्धा का माहौल है। उसके बिना एक कदम भी आगे जाना मुश्किल है। जब पहली फिल्म रविकिशन के साथ कर रही थी, तब भी डर नहीं लगा था, जबकि वे सुपरस्टार थे और हैं। मेरे काम को देखने के बाद ही तो भोजपुरी में मेरी मांग बढ़ी। इंडस्ट्री को लगा कि मैं भी कतार में शामिल हो सकती हूं। 2012-2013 में सर्वाधिक फिल्मों का रिकार्ड बना। सभी बड़े कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिला। लोग कहने लगे कि अंजना का बाजार बड़ा हो गया है। दर्शक मुझे किसी न किसी रूप में परदे पर देखना ही चाहते हैं। दर्शकों के इसी प्यार के कारण मुझ में आत्मविास काफी बढ़ गया है और मैं कठिन से कठिन किरदार निभाने के लिए तैयार हो गयी हूं। अभी तक लगभग तीन दर्जन फिल्मों में काम करने का मौका मिला है। आने वाली फिल्मों में दूध का कर्ज, मोकामा जीरो किलोमीटर, बैंड बाजा बरात, तेरे जैसा यार कहां, मेहरारू पार्टी जिंदाबाद, हीरो गमछा वाला आदि प्रमुख हैं।
आपका परिवार, रिश्तेदार और दोस्त आपकी यानी भोजपुरी फिल्में कितना देखते हैं?  क्या वे सलाह देते हैं कि भोजपुरी से हिंदी में चली जाओ।
मेरी फिल्में तो देखते ही हैं, उन्हें कोई परहेज नहीं है। तारीफ भी करते हैं और जहां उन्हें कुछ गलत लगता है उस पर टोकते भी हैं। लेकिन उन्हें फिल्म का शास्त्र तो पता नहीं है कि कैसे काम होता है। लेकिन सच बताऊं कि मैं सिर्फ स्क्रिप्ट देखकर फिल्में साईन नहीं करती बल्कि पूरा पैकेज देखती हूं कि निर्माता और निर्देशक के साथ हीरो कौन है। फिल्म की सफलता का कोई एक फार्मूला नहीं होता है। लेकिन हिट का स्वाद तो चाहिए ही वरना गायब होने में देर नहीं लगेगी। हां, इतनी फिल्में करने के बाद अब सुझाव तो आने ही लगे हैं कि मुझे हिंदी की तरफा जाना चाहिए। लेकिन यहां की व्यस्तता को छोड़कर भीड़ का हिस्सा बनने हिंदी में क्यों जाऊं? मुझे सारा सुख संतोष यहां मिल रहा है।
 अर्चना उर्वशी
     udaybhagat@gmail.com