Saturday, February 2, 2013

Ravi varta जिला गाजियाबाद

राजनीति का खेल ही कुछ ऐसा है , काम ख़तम आदमी ख़तम ... हमारा महानगर के सभी पाठको को आपके अपने रवि किशन का प्रणाम . फरबरी महीने की शुरुवात हो चुकी है और यह महिना मेरे लिए ख़ास है क्योंकि इसी महीने की 22 तारीख को मेरी बहुप्रतीक्षित फिल्म जिला गाजियाबाद रिलीज़ हो रही है . आप सोच रहे होंगे की हर महीने ही मेरी कोई ना कोई भोजपुरी, हिंदी फिल्मे रिलीज़ होती ही हैं , इसमें कौन सी नयी बात है तो आपको बता दूं की जिला गाजियाबाद इस साल की मेरी पहली फिल्म है और इस फिल्म के बाद से मेरी फिल्मो के रिलीज़ होने का सिलसिला शुरू हो रहा है , यही नहीं , जिला गाजियाबाद में अपनी भूमिका के लिए मैंने खुद को एक गेंगस्टर की तरह जिया है . जब भी कोई फिल्म बनती है तो उसके साथ सौ दो सौ लोग प्रत्यक्ष और लाखो लोग अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े होते हैं . एक टीम वर्क होता है जहां सबको अपना काम इमानदारी और मेहनत से करना होता है . यह बात हर भाषा की फिल्मो पर लागू होती है . टीम वर्क अच्छा रहा तो फिल्म भी अच्छी बनती है और और परिणाम भी सुखद होता है . मैं यह बात यहाँ इसीलिए कह रहा हूँ क्योंकि लगभग दो सौ से भी अधिक फिल्मे करने के बाद मैंने महसूस किया है की टीम वर्क जहाँ कमजोर हुआ उसका असर फिल्मो पर पड़ता है . जिला गाजियाबाद एक अच्छी टीम वर्क का बेहतरीन उदहारण है , सबने अपना काम, अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाया है यही नहीं सबने एक दुसरे के काम में हाथ भी बंटाया है . जिला गाजियाबाद के बारे में मैं ज्यादा कुछ तो नहीं बता पाउँगा बस इतना ही कहूँगा की अपराध और अपराधियों की पृष्ठभूमि पर बनी ये एक बेहतरीन फिल्म है जिसमे मैं एक माफिया सरगना की भूमिका में हूँ . ये कहानी है पश्चमी उत्तर प्रदेश के दो माफिया सरगना सतबीर गुज्जर और महेंद्र फौजी की आपसी अदाबत की . इसे आप एक सच्ची घटना पर आधारित फिल्म का भी नाम दे सकते हैं . नब्बे के दशक में पूरा पश्चिम उत्तर प्रदेश संगठित अपराध की चपेट में था . इसी मुद्दे को आधार बना कर यह फिल्म बनी है . संजय दत्त, अरसद वारसी , विवेक ओबेराय, परेश रावल, चंद्रचूड सिंह जैसे कलाकारों के साथ काम करने का अनुभव काफी अच्छा रहा , वैसे इन कलाकारों के साथ अलग अलग काम कर चूका हूँ पर एक साथ काम करना काफी सुखद अनुभूति वाला रहा . मैं कल ही हैदराबाद गया था इस फिल्म के म्यूजिक रिलीज़ के लिए . मैं धन्यवाद देना चाहूँगा निर्माता विनोद बच्चन और निर्देशक आनंद कुमार का जिन्होंने प्रोमोशन की अच्छी योजना बनायी है . हैदराबाद में म्यूजिक रिलीज़ के बाद आज ही मुंबई लौटा हूँ और कलर्स टीवी के एक शो में भाग लेने जा रहा है . इस शो के बारे में अगले शनिवार चर्चा करूँगा . फिलहाल तो आपसे यही कहूँगा जिला गाजियाबाद एक अच्छी फिल्म बनी है और आपको इस फिल्म से भरपूर मनोरंजन मिलेगा . वैसे साल 2013 में आप लोगो के लिए मेरे पास अच्छी अच्छी फिल्मो की लम्बी लाइन है .. डॉ . चंद्रप्रकाश द्वेदी जी की मोहल्ला अस्सी , दसविदानिया और चलो दिल्ली जैसी फिल्म बना चुके शशांक की बजाते रहो, लकी कबूतर , यश राज की मेरे डैड की मारुती सहित कई फिल्मे हैं , भोजपुरी में भी ऐसी ही फिल्मो की कतारे हैं जिनमे दिलआवेज़ खान की साली बड़ी सतावेली, दीपक तिवारी की धुरंधर, सनोज मिश्र की प्रेम विद्रोही, सुनील सिन्हा की प्रतिबन्ध , दयाल निहलानी की छपरा के प्रेम कहानी आदि शामिल हैं। खैर, इन फिल्मो की चर्चा बाद में करूँगा . अगले शनिवार फिर आपसे मुलाकात होगी . आपका रवि किशन