Monday, July 11, 2016

उम्मीद से कहीं ज्यादा मिला - अंजना सिंह


भोजपुरी फ़िल्म जगत में फटाफट क्रिकेट की तरह फटाफट फ़िल्म करने वाली अंजना सिंह ने मात्र पांच साल के ही अपने  फ़िल्मी कैरियर में पचास फिल्मो की शूटिंग पूरी कर एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया है , वो भी तब जब इस बीच लगभग 10 महीने तक वो अपने निजी कारणों की वजह से कैमरे से दूर रही । हालांकि अंजना ने अपने शुरुवाती साल में ही 17 फिल्में साइन कर और 11 फिल्मो की शूटिंग पूरी कर लोगो को यह आभास करा दिया था की वह भोजपुरिया पिच पर लंबी पारी खेलने आई है । भोजपुरी के सभी स्टार्स के अलावा कई नवोदित अभिनेताओं के साथ स्क्रीन शेयर कर चुकी अंजना सिंह को भोजपुरी फिल्मो की हॉट केक कहा जाता है और इसकी वजह भी उनकी फिल्मो में लगातार व्यस्तता ही है ।  अपनी पचासवीं फ़िल्म शहंशाह की डबिंग के दौरान उन्होंने अपने फ़िल्मी कैरियर सहित निजी सवालो पर भी खुल कर बात की । गजब की सेन्स ऑफ़ ह्यूमर रखने वाली अंजना से हुई बातचीत के प्रमुख अंश .
भोजपुरी फिल्मो में शुरुवात कैसे हुई ?
फिल्मो में आना तो तय था लेकिन माध्यम क्या होगा इसकी जानकारी नहीं थी । मुम्बई में स्ट्रगल के दौरान मुझे एक बड़े प्रोडक्शन हाउस श्रेया क्रियेशन की धारावाहिक भाग ना बांचे कोई में मुख्य भूमिका मिल गयी । इस धारावाहिक ने मेरी भोजपुरी सुधार दी थी । उसी दौरान निर्देशक फ़िरोज़ खान अपनी फ़िल्म फौलाद के लिए हीरोइन की तलाश में थे उन्होंने मुझे बुलाया और रवि किशन के अपोजिट कास्ट किया । मेरे लिए यह अप्रत्याशित था क्योंकि पहली ही फ़िल्म में रवि किशन जैसे बड़े स्टार के साथ काम करना एक सपना जैसा लग रहा था ।
यकायक फिल्मो की बाढ़ कैसे आ गयी आपकी झोली में ?
मेरी किस्मत अच्छी थी की मुझे फ़िल्म के लिए इंतज़ार नहीं करना पड़ा । फौलाद की शूटिंग के दौरान ही राजकुमार पांडे सेट पर आये और अपनी फ़िल्म ट्रक ड्राइवर के लिए पवन सिंह के अपोजिट साइन कर लिया । इसके बाद तो फिल्मो का सिलसिला शुरू हो गया । अपनी पहली फ़िल्म रिलीज़ होने तक मैं 5 फ़िल्म साइन कर चुकी थी जिनमे संतोष मिश्रा की कइसन पियवा के चरित्तर बा , खेसारी लाल के साथ दिल ले गइल ओढनिया वाली और निरहुआ के साथ वर्दी वाला गुंडा शामिल थी । हालात यहाँ तक सुखद हो गया की मैं अपने किराए के घर में पुरे साल में मुश्किल से 15 दिन रही बाकी समय आउटडोर में शूटिंग करती रही ।
पहली से पचासवीं फ़िल्म के सफ़र में आपने क्या पाया और क्या खोया ? 
खोना पाना जिंदगी का हिस्सा है । दर्शको के प्यार , मेरी किस्मत , कलाकारों और निर्माता निर्देशको के मेरे ऊपर भरोसे के कारण उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर बहराइच के एक सामान्य परिवार की लड़की को उसकी उम्मीद से कहीं ज्यादा हासिल हुआ । मैं इस मामले में खुद को खुशकिस्मत मानती हूँ । जहां तक खोने की बात है तो इस दौरान मैंने खुद को खो दिया । खुद की आजादी छीन गयी । रोना , हँसना , खुश होना सभी बनावटी हो गया । यानि मेरा इमोशन भी प्रोफेशन का और कैमरे का हिस्सा बन गया ।
अपनी आने वाली फिल्मो के बारे में बताइये ?

मेरी आने वाली फिल्मो में मेरी पचासवीं फ़िल्म शहंशाह है जिसके पोस्ट प्रोडक्शन का काम चल रहा है । इस फ़िल्म की सबसे बड़ी खासियत ये है की मेरी पहली फ़िल्म के को स्टार रवि किशन के साथ इस फ़िल्म में भी स्क्रीन शेयर कर रही हूँ । निर्देशक आनंद डी गहतराज की इस फ़िल्म के निर्माता है रोहित के सिंह और विवेक रस्तोगी । इस के अलावा पूर्वांचल टाकीज की बेटा में मैं निरहुआ के साथ हूँ । निर्देशक विशाल वर्मा और निर्माता विकास कुमार की यह फ़िल्म भी प्रदर्शन के लिए तैयार है । निर्देशक रवि भूषण की तेरे  जईसा यार कहाँ में मैं भोजपुरी के भीष्म पितामह कुणाल सिंह के बेटे आकाश सिंह यादव और पवन सिंह के साथ दिखूंगी । भोजपुरी फिल्मो के संकटमोचन कहे जाने वाले सुजीत तिवारी की मोकामा जीरो किलोमीटर में मैं निरहुआ के साथ हूँ । इस फ़िल्म के निर्देशक संतोष मिश्रा हैं । विराज भट्ट के साथ दिल है की मानता नहीं ,  राकेश मिश्रा के साथ सन् ऑफ़ बिहार भी प्रदर्शन के लिए तैयार है । इन फिल्मो के अलावा लगभग आधा दर्जन फिल्मो की शूटिंग अभी होनी है ।
आपकी सफलता का राज क्या है ?
मैं तो बस काम करती गयी । दर्शको ने मेरे काम को सराहा , निर्माता निर्देशको को मेरा काम पसंद आया । मीडिया ने मेरे काम को जन जन तक पहुचाया । मेरे परिवार ने मुझ पर भरोसा किया । मेरी सफलता के पीछे इन सभी का हाथ है ।udaybhagat@gmail.com