Thursday, May 21, 2015

अच्छी फिल्मो से ही बनती है पहचान - अपूर्वा

मैं अपने पाँव पर खड़ी होना चाहती हूँ, आत्मनिर्भर बनना चाहती हूँ , यही सोचकर भोजपुरी फिल्म जगत से जुडी और मुझे ख़ुशी है की भोजपुरी ने मुझे अपना लिया और मैं भोजपुरी में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रही हूँ।   ये वक्तव्य अभिनेत्री अपूर्वा बिट द्वारा दिया गया है। सिलवासा में अपनी अगली फिल्म बरसात की शूटिंग के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए अपूर्वा ने  विभिन्न मुद्दो पर बेबाकी से अपनी राय रखी।   प्रस्तुत है कुछ अंश -
बरसात में अपूर्वा क्या कर रही है  ? 
बरसात गर्मी से निजात दिलाता है और मेरा किरदार इस फिल्म में बिल्कुल अलग है , जो एक आम लड़की होते हुए भी ख़ास बनने की चाहत रखती है।  अच्छी कहानी और अच्छे निर्देशक मोहन आज़ाद के साथ राकेश मिश्रा और नेहा श्री जैसे कलाकार हैं तो बरसात का आनंद बढ़ जाता है।
आपकी  आने वाली फिल्मे कौन कौन सी है   ?
जगदीश शर्मा  की एक्शन थ्रिलर ‘‘हथियार’’ है। इसमें मैं एक चुलबुली लड़की हूँ। विराज भट्ट, विशाल मेरे हीरो हैं।
ये तो आने वाली है, जो आकर चली गयी, वो?
राजीव राय के निर्देशन में बनी ‘‘मेरे साजन तेरे कारण’’। हाल ही में प्रदर्शित हुई है हमसे बढ़कर कौन , जिसमे मैं एक टपोरी लड़की की भूमिका में थी।  इसी साल रिलीज़ हुई है  सेटिंगबाज़ , राहुल  सिंह इस फिल्म  में मेरे  हीरो थे । सहारा टीवी पर भी कई धाराावाहिकों में काम किया। महुआ टीवी के ‘जुगाड़ूलाल’ में मैं और राहुल साथ-साथ थे। इसके पूर्व  साथ बीबी नंबर १ और लाल दुपट्टा मलमल का भी रिलीज़ हुई है।
 आप तो बंगाल से हैं, सीधे भोजपुरी सिनेमा में कैसे आ गयीं?
सीधे नहीं आयी। बांग्ला फिल्मों के सीनियर और सुपर स्टार प्रसन्नजीत जी  के साथ मैंने एक फिल्म की है-‘‘बंधु’’। फिर मुुंबई आ गयी और श्रीधर शेट्टी  की फिल्म ‘‘खूनी दंगल’’ से भोजपुरी में आ गयी। विनय आनंद मेरे हीरो थे।
इस यात्रा का मूल कारण बंगला फिल्मोद्योग में मनोनुकूल ‘रिस्पाँस’ नहीं मिलना था, क्या?
नहीं, मैं चाहती थी, एक दायरे में नहीं बंधू। राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना चाहती थी, पर सीधे हिन्दी में प्रवेश थोड़ा रिस्की लगा। अब भोजपुरी ही अकेली एक क्षेत्रीय भाषा है, जो एक चोथाई देश को कवर करती है और मैं आ गई।
भोजपुरी फिल्म जगत में खुद को कहाँ पाती हैं आप ? 
मैंने बहुत ज्यादा काम नहीं किया , पर जो भी किया उससे मुझे संतुष्टि मिली है।  दर्शको का प्यार और निर्माता - निर्देशकों का भरोसा मिले यही एक कलाकार की चाहत रहती है। खुद का मुकम्मल स्थान बनाने के लिए फिल्मो की संख्या मायने नहीं रखती बल्कि अच्छी फिल्म और अच्छे किरदार से पहचान बनती है।   udaybhagat@gmail.com