Saturday, June 29, 2013

उन्हें जरुरत है मदद की

हमारा महानगर के सभी पाठको को आपके अपने रवि किशन का प्रणाम . अपनी आस्था के प्रतिक बाबा विशाव्नाथ की नगरी बनारस में हूँ और यही से आपसे मुखातिब हो रहा हूँ . दरअसल एक कार्यक्रम के सिलसिले में आजमगढ़ आया था , अपने गाँव के करीब जाकर माता पिता से ना मिलूं ऐसा हो ही नहीं सकता . एक असीम अनुभूति का एह्साह होता है उनसे मिलकर . खुद को बहुत खुशनसीब मानता हूँ की आज भी मेरे माता पिता की सलाह मुझे प्रेरणा देती है . आज उनसे केदारनाथ में आई विपदा पर बात चल रही थी तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा मनुष्य खुद अपना दुश्मन बन गया है , सारे धर्मस्थल आज सौदागरों के चपेट में हैं . बाजारीकरण के इस दौर में इंसान इतना अंधा हो गया है की प्रकृति के सिद्धांतो को बिल्कुल अनदेखा कर चल रहा है इसी का नतीजा है की आज प्रकृति हमें यदा कदा सबक सिखाती रहती है . प्रकृति अपनी राह चलती है और उस राह में जो आता है उसका विनाश निश्चित है . केदार नाथ के बारे में पिछले सप्ताह भी मैंने काफी कुछ लिखा था की कैसे लोगो ने पहाडो को काट काट कर मकान बना लिए , कैसे उन्होंने जंगलो को उजाड़ दिया और कैसे उन्होंने नदी की धरा को संकीर्ण कर दिया . अब उन सब का परिणाम हमारे सामने है . खैर जो हुआ सो हुआ , अब वक़्त है इसकी चपेट में आये लोगो को फिर से मुख्यधरा में जोड़ने की . मैंने एक एन जी ओ गूंज के द्वारा हर संभव मदद की है उस आपदा पीडितो के लिए , मेरी गुजारिश है की आप भी उनके पुनर निर्माण में अपना सहयोग दे . बूंद बूंद से घड़ा भरता है . आपका कुछ पैसा भी लोगो के पैसे से जुड़ कर करोडो अरबों में बदल सकता है .वहाँ की हालत किसी से छिपी नहीं है , लोग पचास साल पीछे चले गए हैं . जान माल का नुक्सान तो पूरा नहीं किया जा सकता पर उनकी आवश्यक जरूरतों को पूरी कर हम उनके चेहरे पर मुस्कान ला सकते हैं . इसीलिए, भाइयों आप ठान ले की उनके लिए कुछ ना कुछ करना है , आपकी मंशा अवश्य सफल होगी . हमारा मुंबई भी चारो और से समुद्र से घिरा है और हमने भी विकास के नाम पर प्रकृति को काफी नुक्सान पहुचाया है . २६ जुलाई २००५ की घटना आज भी जेहन में आते ही मन काँप जाता है , हालांकि उस घटना में प्राकृतिक से ज्यादा मानवीय लापरवाही ज्यादा थी पर वह प्रकृति की और से यह घंटी थी की अभी भी चेत जाओ वर्ना खैर नहीं . २६ जुलाई का जिक्र आते ही इस बार यानी की इस साल की २६ जुलाई का जिक्र मैं जरुर करूँगा आपसे . इस साल इस दिन मेरी दो हिंदी फिल्मे रिलीज़ हो रही है . पहली फिल्म है निर्देशक मनीष तिवारी की इसक और दूसरी शंशाक शाह की बजाते रहो . दोनों ही फिल्मे अलग अलग तरह की है और दोनों में मेरा काम बिल्कुल अलग है . इसक में जहां मैं तीता सिंह के किरदार में हूँ वहीँ बजाते रहो में एक मिलेनियर के किरदार में . दोनों ही फिल्मो के निर्देशक काफी मशहूर रहे हैं और तकनिकी तौर पर काफी मजबूत भी . हाल ही में दोनों ही फिल्मो का फर्स्ट लुक रिलीज़ किया गया था , जिसने भी इसे देखा लोगो ने इसकी सराहना की . मुझे भी लगता है की आपलोगों को दोनों ही फिल्मे जरुर पसंद आएगी . बात फिल्मो और उनके निर्देशकों की निकली है तो मैं भोजपुरी फिल्म धुरंधर - द शूटर्स के निर्देशक दीपक तिवारी का जिक्र जरुर करना चाहूँगा . बहुत ही अच्छी फिल्म बनायीं है उन्होंने . फिल्म इसी जुलाई की १२ तारीख को बिहार में रिलीज़ हो रही है . मैं इस फिल्म के प्रोमोशन के लिए कुछ दिन बिहार में रहूँगा . जिन दर्शको ने आज मुझे इतनी उंचाई तक पहुचाया, जिन्होंने भरपूर प्यार दिया उनके सामने जाना एक सुखद अनुभूति प्रदान कराती है अगले सप्ताह फिर आपसे मुलाकात होगी . चलते चलते आपसे फिर से गुजारिश है की उत्तराखंड को आपकी हमारी मदद की दरकार है .. आपका रवि किशन udaybhagat@gmail.com